किस्सा एक पुराना बच्चों लंका मे था रावण, राजा एक महा अभिमानी कांपता जिससे कण-कण। उस अभिमानी रावण ने था सबको खूब सताया, रामचंद्र जब आये वन में सीता को हर लाया।

Dussehra Ke Paawan Avsar Par Aapko Hardik Badhai

आप सब को मेरी और से दशहरे की हार्दिक बधाई 

पिछले हफ्ते से अपने ब्लॉग से दूर रहा किसी कारण से .....अब फिर से वापिस आ गया हु अपने ब्लॉग को एक नए रूप में लेकर लोग दिवाली आने से पहले अपने घरो पर रंग करवाते है और सफाई करते है तो मैंने भी सोचा की दिवाली आने से पहले अपने ब्लॉग की पुताई कर दू और थोड़े से रंगों का बदलाव कर दू बहुत टाइम हो गया था एक ही रंग में अपने ब्लॉग को देखते देखते आज मैंने अपने ब्लॉग में एक नयी सुविधा भी जोड़ी है वो सुविधा है फेसबुक की तरह लाइक बटन यानि अगर आपको मेरी कोई पोस्ट पसंद आये तो आप कमेन्ट के साथ साथ उसे लाइक भी कर सकते हो 
किस्सा एक पुराना बच्चों लंका मे था रावण,
राजा एक महा अभिमानी कांपता जिससे कण-कण।
उस अभिमानी रावण ने था सबको खूब सताया,
रामचंद्र जब आये वन में सीता को हर लाया।

झलमल-झलमल सोने की लंका पैरो पर झुकती,
और काल की गति भी भाई उसके आगे रूकती।
सुंदर थी लंका, लंका में सोना ही सोना था,
लेकिन पुन्य नही, पापों का भरा हुआ दोना था।

तभी राम आए बन्दर भालू की लेकर सेना,
साध निशाना सच्चाई का तीर चलाया पैना।
लोभ-पाप की लंका धू-धू जलकर हो गई राख,
दीए जले थे तब धरती पर अनगीन, लाखों-लाख।

इसलिए तो आज धूम है रावण आज मरा था,
कटे शीश दस बारी-बारी उतरा भार धरा का।
लेकिन सोचो, कोई रावण फिर छल न कर पाए,
कोई अभिमानी न फिर से काला राज चलाए।
तब होगी सच्ची दीवाली होगा तभी दशहरा,
जगमग-जगमग होगा तब फिर सच्चाई का चेहरा।

और चलते चलते दशहरे का एक गेम भी खेलते जाइये बहुत ही आसन गेम है ये आपको मजा आएगा खेल कर 

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Mayank Bhardwaj

                    ------------चेतावनी----------- 
इस profile में लिखी गयी सारी बातें सत्य घटना पर आधारित हैं । इन बातों का किसी और व्यक्ति/घटना से किसी भी प्रकार से मिलना (वैसे किसी से मिलेगी नही) महज़ एक संयोग समझा जाएगा । ********************** मैं एक नम्बर का लुच्चा, लफंगा, आवारा, बद्तमीज़, नालायक, बदमाश, दुष्ट, पापी, राक्षस (और जो बच गया हो उसे भी जोड़ लो) कतई नही हूँ यार । हाँ दारू, सुट्टा, गाँजा, अफ़ीम, हेरोइन वगैरह……अबे ये सब भी नही पीता हूँ यार मैं बहुत होनहार , सीधा-साधा , सबको प्यार करने वाला , नेक दिल , ईमानदार, हिम्मती, शरीफ़ (अबे पूरे शरीर से शराफ़त टपकती है भाई), भोलाभाला (बस भोला हूँ भाला वगैरह नही रखता यार………अबे आदिवासी ठोड़े ही हूँ) लडका हूँ 

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5 comments so far,Add yours

  1. दशहरे की शुभकामनाएँ!

    नया रूप अच्छा है।

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  2. आपके टेम्पलेट के विषय में काफी दिनों से कहना चाह रहा था वैसे मैं ये बात इमेल से भी कह सकता हूँ पर शायद मैं गलत भी हो सकता हूँ इसलिए सबके सामने ये बात कहना पड़ रहा है .
    आपके ब्लॉग का नया रूप उतना नया नहीं है हाँ रंग बिरंगा जरुर है .
    आपके ब्लॉग को थोडा व्यवस्थित करने की जरुरत है खासकर साइडबार और उसके विजेट्स को
    लिंक मेनू बार भी थोडा व्यवस्थित और बेहतर हो सकता है
    संभव हो तो कुछ विजेट हटा दें या फिर तीन कालम वाला टेम्पलेट लगा लें जिससे इन्हें व्यवस्थित करने में आसानी हो .

    बाकी आपके ब्लॉग के पाठकों और आपकी इच्छा पर निर्भर करेगा .

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  3. दशहरे की हार्दिक शुभकामनाएँ । नये रंग अच्छे लगे ।

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  4. नवीन जी मैं आपकी बात पर बहुत जल्दी अमल करूँगा और साईट बार से विजेट हटाने की कोशिश करूँगा बताने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद :q

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  5. दशहरे की बहुत बहुत शुभकामनाये, आपका ब्लॉग वापस आ गया यही जानकार बड़ी खुशी हुई|

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