इस पोस्ट के जरिये करे भगवान शंकर को खुश

Hindi Tech Guru
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कल यानि मंगलवार की सुबह सूर्य की पहली किरण के साथ श्रावण मास यानी सावन के मोसम का स्पर्श प्रथ्वी से होगा जिसके कारण सूर्ये की तपिश से राहत मिलेगी साथ ही प्रक्रति की, जीवन की, पोधो, जीव जन्तुयो की नयी धुन शुरू हो जायेगी।
आग बरसाते आकाश में धुमडते, गरजते बदलो से बरसाती पानी की बोझारे, बर्फानी बुँदे न केवल तपती देह में सनसनाती तूफानी ताजगी का संचार करेगी बल्कि पेड़ पोधे भी नयी रंगत के साथ इठलाने लगेंगे। कहा जाता है की अगर इस मास की प्रथम वर्षा का जल अपने निवास में रखा जाए तो उसके प्रभाव से अनेक कष्टों का निवारण होता है तथा साझात माँ गंगा का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है।
वर्ष के बारहों महीनो में सावन महीने का सबसे अलग महत्व है। यह महिना देवाधिदेव भगवान शिव जी को सबसे ज्यादा प्रिय है। यह महिना सभी व्रत तथा धर्म का रूप है सावन में सोमवार का विशेष महत्व है। सावन महीने के प्रथम सोमवार से शुरू कर निरंतर किये जाने वाला व्रत सभी मनोकामनाए पूरी करता है।
हम में से बहुत से लोग ऐसे भी है जिन्हें ज्ञान ही नहीं होता की सावन के महीने में शिव की पूजा केसे की जाए। सच पूछो तो मुझे भी ज्ञान नहीं शिव जी की पूजा का। इसी ज्ञान की तलाश में मैं गूगल देवता की शरण में गया गूगल देवता ने मुझे मेरे मन के मुताबिक उस ब्लॉग का लिंक दिया जिस पर जाकर मुझे हर वो शिव जी की पूजा की जानकारी मिली जिसे मैं बहुत दिनों से खोज रहा था सावन का महिना शुरू होने से पहले मेरे लिए किसी वरदान से कम नहीं है ये ब्लॉग।

 इस ब्लॉग से मैंने बस एक ही मेग्जिन डाउनलोड करी उसी मेग्जिन में मुझे हर सवाल का जवाब मुझे मिल गया अगर आपको भी वो मेग्जिन डाउनलोड करनी है तो आप यहाँ क्लीक करके उस मेग्जिन को डाउनलोड कर सकते है। या फिर सीधे यहाँ क्लीक करके उस ब्लॉग पर आकर मेग्जिन डाउनलोड कर सकते है।

शिव जी से जुडी और भी बाते आपको इस ब्लॉग पर मिल जायेगी जिनके लिंक में निचे दे रहा हु।

1 से 14 मुखी रुद्राक्ष धारण करने से लाभ (भाग:1)

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शिव पंचदेवों में देवो के देव महादेव हैं।

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महामृत्युंजय मंत्र जाप कब करें? 

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शिवजी की आरती (शिव आरती -१) 

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शिव मंत्र 

महाशिव रात्रि विशेष 

शिव तांडव स्तोत्र 

महामृत्युंजय मंत्र

उम्मीद है मेरी इस पोस्ट से इस बार के सावन में की गयी शिव जी की पूजा से आपकी हर मनोकामनाए पूरी होगी।

                         ॐ नमः शिवायः 

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