Kedarnath Dham Yatra Ki Jankari. धीरे धीरे ये बादल और गहरे होते गए. और देखते ही देखते हलकी हलकी बारिश शुरू हो गयी. बारिस होने से रास्ते में टेम्प्रेचर 0 डिग्री से निचे चला गया. अब बारी थी Snowfall बर्फ़बारी ही. बस देखते ही देखते बारिश की बूंदो ने बर्फ़बारी का रूप ले लिया। मेरी सोची हुई बात भगवान ने सुनी और पूरी कर दी.

Hindi Tech Guru के सभी पाठको का स्वागत है मेरी आज की Kedarnath Dham Yatra की पोस्ट मैं. जिसमे मैं आपको Char Dham में प्रमुख Kedarnath Dham के बारे में बताने वाला हु. तो चलिए भगवान शंकर का नाम लेकर शुरू करे है अपनी पहली केदारनाथ यात्रा की कुछ ऐसी बाते जो सीधे मेरे दिल से निकलेगी. बोलो शंकर भगवान की जय. अपनी आज की पोस्ट के द्वारा मैं आपको भगवान केदारनाथ धाम के दर्शन भी करवाऊंगा. मेरी आज की इस पोस्ट का टाइटल है Kedarnath Dham Yatra ki Jankari Aap Bhi Kare Darshan.
Kedarnath Dham Yatra ji jankari
Kedarnath Dham Yatra ji jankari
Kedarnath Dham के बारे में तो आप सभी जानते ही हो. हमारे Uttarakhand में स्तिथ Char Dham में से एक Kedarnath Dham Shiv भगवान का वो स्थान है. जहा हर किसी का जाने का सपना होता है. चारो तरह बर्फ की चोटियों से घिरा केदारनाथ धाम एक ऐसा धाम है. जहा भगवान शिव विराजमान है.  

Kedarnath Dham Yatra Ki Jankari Hindi me 

मेरा बहुत सालो से मन था कि मैं भी Kedarnath Dham जाकर भगवान् भोलेनाथ के दर्शन करू. लेकिन परेशानी थी अकेले में जा नहीं सकता था. और कोई जाने वाला साथी साथ चलने के लिए तैयार ही नहीं था. आज के टाइम में सभी को अपनी जॉब की बहुत चिंता है. जिस से भी जाने के लिए बोलो बस एक ही जवाब मिलता है यार Office से छुटटी नहीं मिलेगी. दुनिया सच में बहुत बदल गयी है भगवान से मुलाकत करने के लिए भी टाइम नहीं निकाल पाती है. 

खेर मेरा तो मन था ही केदारनाथ धाम जाकर भगवान शिव जी के दर्शन करने का तो भगवान भोलेनाथ ने मेरी भी सुनी और मुझे भी अपने धाम आने का मौका दिया. केदारनाथ जाने के लिए मैंने अपने एक Friend या यु कहे एक फेमली मेंबर जैसे इंसान को बोला. तो उसमे बोला ठीक है Mayank भाई मानसून खत्म होते है हम लोग Kedarnath Dham चलेंगे। 

मैंने पूछा हम केदारनाथ जाने के लिए मानसून रुकने का क्यों इन्तजार करे तो उसमे बोला मानसून खत्म होने के बाद सभी रास्ते ठीक होते है. और वो टाइम Off सीजन का होता है. तो हमे दर्शन भी अच्छे से हो जाएंगे। और हमे जाने में भी कोई परेशानी नहीं होगी। उसकी बात को मेने समझा और मानसून खत्म होने का इन्तजार करने लगा.

आप सभी को मालूम ही होगा जून के महीने में मानसून शुरू होता है और सितम्बर में खत्म होता है. तो मैंने Char Dham के कपाट खुलने से लेकर यानी मई से लेकर सितम्बर तक का इन्तजार किया। खेर Time बीतता गया और मानसून भी खत्म होने की स्टेज पर आ गया. यानी सितम्बर का महीना आ गया.

Kedarnath Dham Yatra Ki Suruaat

अब बारी थी Kedarnath Dham Yatra करने की. मैंने अपने Friend को फोन लगाया और पूछा क्या प्लान है. मानसून खत्म हो गया है. कब चलना है और कितने मेंबर चलेंगे हमारे साथ. तो सामने से जवाब आया की एक दो दिन में बताता हु. दो तीन बन्दों को और बोलता हु. सब एक साथ मिल कर Kedarnath Dham Yatra पर चलेंगे।

मैंने बोला जो भी करना है जल्दी करो कही कपाट बंद ना हो जाए. यह मैं दीपावली से 2 हफ्ते पहले की बात कर रहा हु. दिवाली के आसपास चारधाम के कपाट बंद हो जाते है. खेर जैस तैसे करके उसमे 2 और बन्दों को केदारनाथ धाम चलने को राजी किया। और बड़ी मुश्किल से एक गाडी बुक करी.

मैं धन्यवाद देना चाहूंगा अपने उस Friend को जिसने अपनी बात पूरी करते हुवे मेरी केदारनाथ धाम यात्रा के सपने को पूरा किया। मेरी पहली केदारनाथ धाम यात्रा का शुभ समय आया 24 अक्टूवर का. 
kedarnath yatra
kedarnath yatra
24 October को Morning में हम चार लोग गाडी में बैठकर ठीक 7 बजे Haridwar से केदारनाथ जी के लिए निकल गए. जो गाडी आप लोग ऊपर फोटो में देख रहे हो हम उसी में बैठे थे. हम चारो अपनी अपनी तैयारी करके गए थे. हालांकि उस Time हमारे Haridwar में मौसम ठंडा नहीं था. लेकिन हम केदारनाथ धाम के लिए गर्म कपड़ो का पूरा इंतजाम करके गए थे. क्युकी Kedarnath Dham में मौसम -0 डिग्री से निचे पहुंच जाता है.
इस ढाबे पर रुक कर हम लोगो ने नाश्ता किया 
मेरी पहली यात्रा शुरू हुई और हम लोग बिच में नाश्ता करने के लिए रुके। हम सभी लोग सुबह जल्दी निकल गए थे. तो हम सभी ने कुछ खाया पिया नहीं था. ऊपर जो आप Photo देख रहे हो हम वहा रुके और अपने साथ लाये हुवे नाश्ते को इसी ढाबे पर बैठकर खाया. इस ढाबे वाले से हम लोगो ने केवल चाय बनवायी थी. क्या कमाल की चाय बनाई थी इसमें अदरक डाल कर मजा आ गया था.
ये ही वो तीनो दोस्त है जो मेरे साथ गए थे 
ये तीनो अपनी सेल्फी ले रहे थे और मैं इनकी फोटो खींच रहा था 
नास्ता करके हम लोगो ने अपनी यात्रा फिर से शुरू करी. Kedarnath Yatra लम्बी थी तो हम लोग बिच में बहुत सी जगह रुक रुक कर गए. मेरे दोस्तों ने अपनी फोटो भी खिचवाई। और साथ ही उन सभी ने अपनी सेल्फी भी ली. इन लोगो की मस्ती आप ऊपर फोटो में देख सकते हो.

Char Dham Yatra Registration

chardham registration
chardham registration केन्द्र 
Chardham या किसी भी Dham पर जाने से पहले सभी को अपना रजिस्ट्रेशन भी करवाना होता है. तो हम लोगो ने भी अपना रजिट्रेशन करवाया जो की बिलकुल Free था. 
रिजस्ट्रेशन करवा कर हम लोगो ने अपनी यात्रा फिर से शुरू करी और रास्ते में आने वाले मनमोहक सीन को मैंने अपने Mobile के कैमरे में कैद किया। मैं आप सभी को बताना चाहूंगा केदारनाथ धाम पर जितनी भी फोटो मैंने खींची है वो मैंने अपने Mobile Phone के द्वारा ही खींची है. हलाकि मैं Digital कैमरा भी अपने साथ ले गया था. लेकिन उसकी जरूरत कम पड़ी मुझे.
केदारनाथ के रास्ते में स्तिथ झरना 
झरने में साधु की मुद्रा में हमारा एक साथी 
Kedarnath Dham Yatra के दौरान हमे बहुत से जगह रुकने का मौका मिला। कही पाहडो से बहते हुवे झरने। कही दूर वादियों में दिखती हुई बर्फ की चोटिया। कमाल के नजारे देखने को मिले Kedarnath Yatra के दोराम हमे. कुछ बहते हुवे झरनो की फोटो आपके लिए ऊपर दी है. और उन्ही झरनो के बिच मेरा एक साथी भी मौजूद है.

सुबह 7 बजे के निकले हुवे हमे काफी टाइम हो गया था तो हम लोग लगभग शाम को 5 बजे के आसपास सीतापुर पहुंच गए जो की सोनप्रयाग से कुछ किलोमीटर पहले ही है. मैं आपको बताना चाहूंगा सोनप्रयाग Kedarnath Dham Yatra का वो पहला पड़ाव है जहा सभी यात्री रुकते है. और यही से केदारनाथ की पैदल यात्रा शुरू होती है. 

पहले केदारनाथ धाम के लिए पैदल यात्रा गोरी कुंड से शुरू होती थी. लेकिन 2013 में आयी आबदा के बाद गोरी कुंड पूरी तरह तबाह हो गया जिसकी वजह से सोनप्रयाग को ही Kedarnath Dham Yatra का पहला पड़ाव बना दिया गया है.

हम लोग अपने टाइम के हिसाब से थोड़ा जल्दी पहुंच गए थे तो सीतापुर से पहले ही हमे बहुत से Helicopter वाले भी मिले। जिन्होंने हमे बताया की वो 5000 रूपये 1 Member के हिसाब से हमको ऊपर Kedarnath Dham में उतार देंगे। और सुबह Morning में वापिस सीतापुर में ही उतार देंगे। लेकिन हम लोग Helicopter से जाने के बिलकुल भी विचार में नहीं थे. तो हमने उन्हें मना कर दिया।

अब चुकी हम जल्दी सीतापुर आ गए थे तो हमारे पास बहुत टाइम था कही और जाने का. लेकिन उस टाइम Kedarnath की यात्रा शुरू करने का टाइम नहीं था. क्युकी शाम को 6 बजे के आसपास सोनप्रयाग से रास्ते बंद कर दिए जाते है. ज्यादा टाइम होने की वजह से हमने कही और जाने का विचार किया.

Shri Triyuginarayan Temple

Shri Triyuginarayan Temple
Shri Triyuginarayan Temple
सीतापुर के पास ही एक मंदिर है जिसका नाम है Shri Triyuginarayan Temple (श्री त्रियुगीनारायण मंदिर) इस मंदिर के बारे में बोला जाता है कि भगवान शिव जी ने पार्वती माता के साथ इसी मंदिर में फेरे लिए थे. इस मंदिर के बारे में मैं कभी आपको विस्तार से बताऊंगा। अभी तो आप ऊपर फोटो देखिये।
kedarnath guest house
Guest house जहा हम लोग रुके थे 
मंदिर के दर्शन करने के बाद हम सीतापुर वापिस आये और वाला एक Guest House में रुके। यह बहुत ही साफ़ सुथरा गेस्ट हॉउस था. मजा आ गया यहाँ रुक कर. सुबह हम इसी गेस्ट हॉउस में गर्म गर्म पानी से नहा कर अपनी यात्रा की शुरुआत की.

रात को गेस्ट हॉउस में रुकने के बाद हम Morning में 7 बजे सोनप्रयाग के लिए गाडी में बैठकर निकल गए. मौसम बिलकुल साफ़ था. तेज धुप थी मैं मन ही मन सोच रहा था कि केदारनाथ धाम में तो अक्सर बर्फ पड़ती है. बढ़ते प्रदूषण के कारण मौसम में इतना बदलाव आ गया है की यहाँ भी इतनी तेज धुप निकल रही है. मैंने मन ही मन सोचा काश अगर Kedarnath धाम में बर्फ पड़ जाती तो मजा आ जाता। 

शायद मेरे मन की बाते भगवान भोलेनाथ तक पहुंच गयी थी. क्युकी कुछ ऐसा होने वाला था जिसकी हम चारो लोगो में से किसी ने भी तैयारी नहीं की थी. धुप बहुत तेज थी मौसम बिलकुल साफ़ था तो हम आधी अधूरी तैयार के साथ सोनप्रयाग के लिए निकल गए. 

हमे भरोसा था कि हम केदारनाथ धाम की यात्रा करके शाम तक वापिस आ जायेंगे। क्युकी मेरा जो Friend था वो पहले भी केदारनाथ धाम की यात्रा कर चूका था. तो सब उसी के अनुसार चल रहे थे. ना कोई Mobile को चार्ज करने के लिए Power बैंक। ना कोई ठण्ड से बचने के लिए टोपे और दस्ताने. ना कोई दवाई। हमारे पास सब चीजे मौजूद थी. लेकिन सब हमने अपने रूम में ही छोड़ दी. जो की हमे सीतापुर में लिया हुवा था.
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सोनप्रयाग में मेरे तीनो साथी गाडी वाले से बात कर रहे है 
हम लोग केवल जाकेट पहनकर सोनप्रयाग पहुंचे। सोनप्रयाग पहुंचने के बाद आपको टेक्सी से जाना होता है जो की वही की लोकल होती है. और यह लोकल गाडी आपको गौरीकुंड उतार देती है. ऊपर फोटो में आप देख रहे हो मेरे दोस्त गाडी वाले से बात कर रहे है. और मैं उनकी फोटो खींच रहा हु.

Kedarnath Dham Yatra का पैदल रास्ता 

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gauri-kund जहा से हमारी पैदल यात्रा शुरू होगी 
हम गाडी से गौरीकुंड पहुंचे जैसा आपको ऊपर दिखाई दे रहा है. यह Kedarnath Dham yatra का पहला पड़ाव है जहा से हमे अपनी पैदल यात्रा शुरू करनी है. अगर आप पैदल नहीं जाना चाहते तो यही से घोड़े वाले भी मिलते है. जो 1500 रूपये लेकर आपका आना जाना बुक कर लेते है.
घोड़ो की सवारी करते यात्री 
लेकिन मेरी सलह माने तो आप इनकी सर्विस का इस्तेमाल ना करे. क्युकी इन लोगो को हमारी कोई परवाह नहीं होती। शुरू शुरू में तो यह सभी अपने घोड़े के साथ चलते है. लेकिन आगे जाकर घोड़े को ऐसे ही छोड़ देते है. और इन लोगो की सबसे बड़ी कमी होती है. ये अपने साथ कम से कम 7 या 8 घोड़ो पर सवारी लेकर चलते है. Kedarnath dham में घोड़े की सवारी करना बहुत खतरनाक है.
kedarnath dham ka pedal rasta
केदारनाथ धाम का पैदल रास्ता 
पैदल रस्ते के बिच में दिखा बहुत बड़ा पहाड़ 
पैदल रस्ते में मनमोहक झरना 
इसी झरने का ज़ूम करके लिया गया फोटो 
रास्ते में मेरे साथी फोटो खिचवाते हुवे 
हम लोगो का विचार तो पैदल चलने का ही था तो हमने अपनी Kedarnatha Dham Yatra पैदल ही शुरू करी. अपनी पैदल यात्रा के दोरान हमे बहुत से मनमोहक सीन देखने का मोका मिला। रास्ते में बहुत से झरने देखने का मोका मिला। अपनी कुछ यादगार फोटो मैं आपको ऊपर दे रहा हु. आप भी देखे केदारनाथ के कुछ मनमोहक फोटो।
ये वो ही गोरी कुंड है जहा कभी बड़े बड़े होटल थे 
आपदा के बाद सब कुछ खत्म हो गया 
पैदल यात्रा के दोरान ही हमने गोरीकुंड भी देखा जो की आपदा के दोरान बिलकुल ही खत्म हो गया था. ऊपर जो आपको फोटो दिखाई दे रही है. जिसमे आपको बड़े बड़े पथ्थरो के अलावा कुछ नजर नहीं आ रहा है. वो गोरीकुंड ही है जहा आपदा से पहले आलिशान होटल बने हुवे थे. जिनमे लोग रात को रूककर अगले दिन अपनी यात्रा की शुरुआत करते थे. लेकिन आपदा के बाद गोरीकुंड का नमो निशान ही मिट गया. खेर यह तो होना ही था. चलिए अब आगे चलते है क्युकी यहाँ मेरे पास बहुत कुछ है बोलने के लिए. लेकिन मैं केवल अपनी यात्रा से जुडी बात ही करूँगा।  

शुबह हम लोग जल्दी ही अपने रूम को छोड़कर यात्रा के लिए निकल गये थे. तो हम सभी खाली पेट थे मेरा विचार तो खाली पेट यात्रा करके केदारनाथ जी के दर्शन करने के बाद ही कुछ खाने का विचार था. तो इसलिए मैंने कुछ भी नहीं खाया था. लेकिन जो मेरे साथी थे. वो लोग रास्ते में कुछ ना कुछ खाते हुवे जा रहे थे.
केदारनाथ पैदल रस्ते की चढ़ाई 
पैदल रस्ते पर मेरा साथी 
आपदा के बाद पुराना रास्ता तो तबह हो गया था तो अब Kedarnath Dham के लिए एक नया रास्ता बनाया गया है. जो की हमारी सोच से कही ज्यादा बड़ा और कठीन था. आपदा से पहले रास्ता थोड़ा छोटा था लेकिनअब नया रस्ते में 9 से 11 किलोमीटर का अंतर आ गया है.

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खड़ी चढ़ाई होने के कारण हम लोग बहुत थक चुके थे मैं तो खाली पेट था तो मुझे भी थकान ज्यादा हो रही है. जहा मेरे साथी जगह जगह रूककर खाना खा कर आगे बढ़ रहे थे वही मैं केवल चाय पीकर आगे बढ़ रहा था. मन में बस यह ही विचार था की भगवान Kedarnath जी के दर्शन करने के बाद ही कुछ खाऊंगा।
केदारनाथ के रस्ते में ही अचानक काले काले बादल आने लगे और मौसम खराब हो गया 
भगवान के दर्शन करने की लालसा ही मुझे भूखे पेट आगे बढ़ने की ताकत दे रही थी. लेकिन जैस जैसे हम लोग आगे बढ़ रहे थे वैसे वैसे मौसम भी खराब हो रहा था. जहा Morning में मौसम बिलकुल साफ़ था वही दोपहर को 1 बजे आसमान में काले बादल आने लगे. मुझे लगा शायद ऐसे ही है अभी भाग जायेंगे बादल। लेकिन शायद ऐसा नहीं था. जो बर्फ वाली बात मैंने पैदल यात्रा शुरू होने से पहले सोची थी. वो भगवान शंकर अब पूरी करने वाले थे.

Kedarnath Snowfall

kedarnath snowfall
kedarnath में snowfall होती हुई 
धीरे धीरे ये बादल और गहरे होते गए. और देखते ही देखते हलकी हलकी बारिश शुरू हो गयी. बारिस होने से रास्ते में टेम्प्रेचर 0 डिग्री से निचे चला गया. अब बारी थी बर्फ़बारी Snowfall की. बस देखते ही देखते बारिश की बूंदो ने बर्फ़बारी का रूप ले लिया। मेरी सोची हुई बात भगवान ने सुनी और पूरी कर दी.
kedarnath snowfall ki photo
kedarnath snowfall में फोटो खिचवाता मेरा साथी 
लेकिन हम लोग तो आधी अधूरी तैयारी के साथ यात्रा पर निकले थे किसी ने भी नहीं सोचा था की टेम्प्रेचर 0 डिग्री से निचे पहुंच जाएगा और बर्फवारी हो जायेगी। जब बर्फ़बारी शुरू हुई तो पुरे रास्ते में हमे कोई भी ऐसी जगह नहीं मिली जहा हम अपने आप को गिरती बर्फ से बचा सकते। ठण्ड के मारे हम सभी की कपकपी छूट रही थी. और ऊपर से हमारे ऊपर खूब बर्फ गिर रही थी. साथ में ठंडी ठंडी हुवा। उस टाइम हमे महसूस हुवा जब लोग बर्फीले तूफ़ान में फसते है तो कैसा एहसास होता है. केदारनाथ धाम के पास पहुंच कर ऑक्सीजन की कमी हो जाती है जिसकी वजह से हालत और खराब होती है.

हम तो बस शिव भगवान से यह ही प्राथना कर रहे थे की बस एक बार सही सलामत भगवान केदारनाथ के दर्शन हो जाए. उसके बाद भले ही कुछ भी हो जाए. खेर गिरती बर्फ में हम आगे बढ़ते रहे पूरा शरीर बर्फ से ढक चूका था. ना कोई सर पर टोपा ना कोई हाथो में दस्ताने। बस चले ही जा रहे थे भगवान की एक झलक पाने के लिए.

3 घंटे बर्फ में पैदल चलने के बाद रास्ते में एक चाय की दूकान दिखी वही रुक कर हम लोगो ने चाय  पी और मैं सुबह से खाली पेट था तो धीरे धीरे मेरा शरीर भी मेरा साथ छोड़ रहा था फिर उसी दूकान पर चाय के साथ मैंने बिस्कुट खाया। तब मुझे थोड़ी बहुत आगे चलने की हिम्मत मिली।

उसी दूकान वाले से हमने बर्फवारी के बारे में भी पूछा तो उसमे बताया यह सीजन की पहली बर्फवारी है इस से पहले यहाँ कोई बर्फ नहीं पड़ी. तब मुझे एहसास हो गया भगवान ने मेरे मन की बात सुन ली थी तब ही मुझे बर्फवारी के दर्शन भी करा दिए और उसी में चलते रहने को मजबूर भी कर दिया।

खेर ठण्ड से कपकपाते हुवे सुबह 7 बजे के चले हुवे हम लोग शाम को 5 बजे के आसपास हम लोग Kedarnath Dham पहुंच गए. कहा हमारा प्लान एक दिन में यात्रा पूरी करने निचे सीतापुर में जाने का था और कहा हम लोग पुरे दिन यात्रा करके शाम को केदारनाथ धाम पहुंचे।
kedarnath dham
केदारनाथ जी का मंदिर 
खेर हमारे सामने हमारे भगवान केदारनाथ का मंदिर था और चारो तरफ बर्फ से ढकी हुई चोटियां थी स्वर्ग का नजारा था जब हम केदारनाथ धाम पहुंचे। केदारनाथ धाम पहुंच कर सबसे पहले हमने अपने लिए कमरा बुक किया और फिर चाय पी. जिस टाइम हम पहुंचे उस टाइम मंदिर बंद था.
मंदिर के बहार मेरी फोटो जो की आपको क्लियर नहीं दिखाई देगी 
चाय पीने के कुछ टाइम के बाद ही मंदिर खुल गया अब बारी थी दर्शन करने की ऊपर जो आप फोटो देख रहे हो यह मंदिर के बाहर की फोटो है. सुबह की आरती के बाद बस बाहर से ही दर्शन किये जाए है. मंदिर के अंदर जो केदारनाथ भगवान की शीला मौजूद है उनके दर्शन केवल morning में 5 बजे ही किये जा सकते है. हम लोग बाहर से ही हाथ जोड़कर अपने आप को नसीब वाला मन रहे थे. और इन्तजार था अंदर शीला के दर्शन करने का उसके लिए हमे अगले दिन सुबह 5 बजे आना था. खेर जब केदारनाथ धाम आये है तो सुबह मॉर्निंग में उठकर दर्शन भी करेंगे।

Kedarnath Dham में आपदा के फोटो 

मंदिर के बाहर से ही दर्शन करने के बाद हम लोग कुछ फोटो ग्राफ़ी करने लगे. शाम के 6 बजे के आसपस होने वाले थे तो रौशनी ज्यादा नहीं थी. फिर भी मैंने अपने मोबाइल फ़ोन से ही फोटोग्राफी करी. केदारनाथ धाम में अभी भी आपदा के निशान तरो ताजा थे चारो तरफ केवल बड़े बड़े पथ्थर। और उन पथ्थरो के निचे दबे हुवे मकान होटल सब वैसा का वैसा ही पड़ा था केदारनाथ धाम में. आपदा के कुछ फोटो आपको निचे दे रहा हु. ये सभी फोटो मैंने अपने मोबाइल से ही खींचे है. पूरी यात्रा के दौरान सबसे अच्छी बात यह रही की मेरे मोबाइल की बैटरी ने मेरा पूरा साथ दिया। यात्रा के अगले दिन तक मैंने अपने मोबाइल से फोटो खींचे है.
केदारनाथ में पड़े हुवे बड़े बड़े पत्थर 
पत्थरो के निचे दबे होटल 





केदारनाथ मंदिर के पीछे का सीन जिन बड़े बड़े पत्थरो के कारण मंदिर का बचाव हुवा 
आप ऊपर दिए गए फोटो में केदारनाथ धाम पर हुई घटना को देख सकते हो. मैं तो अपनी आँखों से इतनी बड़े बड़े पत्थरो को देखकर सोच रहा था जब यहाँ गागा के रूप में पानी आया होगा तो यहाँ केसा नजारा होगा। जब इतने बड़े बड़े पत्थर पानी के साथ बह कर आ सकते है. तो उन इंसानो के साथ क्या हाल हुवा होगा। जिन्होंने इस केदारनाथ धाम पर अपनी जान गवा कर. स्वर्ग का रास्ता तय किया। फोटो तो मैंने बहुत खींची थी केदारनाथ धाम की लेकिन मैं आप लोगो के बिच कम ही फोटो दे रहा हु.

शाम के 6 बज गए थे और रात होने लगी थी और बर्फीली हवा भी चल रही थी जिसकी वजह से हम सब की कपकपी छूट रही थी तो अब मेरी बारी फोटोग्राफी बंद करके कुछ खाने की थी. सुबह से कुछ नहीं खाया था मैंने। मेरा शरीर बिलकुल कमजोर हो गया था. हम लोग केदारनाथ में ही स्तिथ एक होटल में खाने लिए गए. जैसे ही खाने के लिए बैठे वह मेरी तबियत खराब हो गयी. इतने ठन्डे मौसम में पसीने ही पसीने मुझे आने लगे. अंदर से अजीब से मन होने लगा. शायद मेरा बीपी लो हो गया था जिसकी वजह से ऐसा हो गया. और ऊपर से सुबह से कुछ खाया नहीं था. तो कुछ ना कुछ तो बुरा होना ही था।

जब मुझे पसीने पसीने आने लगे तो मेरा कुछ मन नहीं कर रहा था खाने का ना ही चलने की हिम्मत हो पा रही थी. फिर उसी होटल मैं मेरे साथियो ने मेरे लिए गर्म पानी करवा कर मुझे पिलाया थोड़ी देर मैं ऐसे ही शांत बैठा रहा. उसके बाद फिर मैंने एक पराठा खाया। वो भी बहुत मुश्किल से खाया। जैसे ही पराठा खाया वैसे ही मुझे...............??......??............. आप समझ सकते हो मेरे साथ क्या हुवा होगा.

अब मुझे थोड़ा ठीक महसूस हो रहा था लेकिन जिस तरह मुझे थकवाट थी ठीक उसी तरह मेरे सभी साथियो को थकावट हो रही थी. पुरे दिन पैदल बर्फवारी में चलकर सबकी हालत बहुत खराब थी. हम लोग 6.30 बजे के करीब ही अपने रूम में चले गए. और जाते ही पड़ कर सो गए. पूरी रात भर केदारनाथ में बर्फवारी होती रही और हम लोग ठण्ड के मारे अपने रूम में कपकपाते रहे. इन्तजार था बस सुबह होने का.

हम सभी सुबह 4.30 बजे उठे और 5 बजे के करीब केदारनाथ जी के मंदिर में पहुंचे। वहा देखा तो बहुत से लोग मंदिर के अंदर मौजूद थे जो भगवान केदारनाथ शिला की पूजा कर रहे थे. हम लोग जैसे ही मंदिर के बाहर पहुंचे। एक पंडित जी आ गए हमारे पास वो ही हमे मंदिर के अंदर ले गए और उन्होंने ही हमसे मंदिर में मौजूद भगवान केदारनाथ जी की बहुत बड़ी शिला की पूजा करवाई। पहली बार अपनी आँखों से केदारनाथ जी के दर्शन किये। जो एक दिन पहले हमारे ऊपर बिता जो हमारी थकावट थी. वो सब खत्म हो गयी. भगवान भोलेनाथ के दर्शन करके।

सुबह के 5.45 तक हम लोग पूजा कर चुके थे. अब हम सभी ने अपने अपने फोन निकाल कर अपने परिवार वालो से बात करी. मैं आपको बताना चाहूँगा मेरे मोबाइल में Airtel और Jio का सिम था यकीन मानिये केदारनाथ धाम में केवल एक ही Mobile कम्पनी के टावर आ रहे थे. वो था Jio फुल टावर थे  4 G के और किसी भी कम्पनी के टावर नहीं थे केदारनाथ में. सच में Jio जेसी कम्पनी ने बहुत ही कम टाइम में अपनी अलग पहचान बना ली है. Kedarnath Dham में फुल टावर के लिए Jio को मेरा सलाम.

Kedarnath Dham में Helicopter की सर्विस 

अब बस हम लोगो की वापिसी की तैयारी थी. हम लोग इतने थके थे की हमारी पैदल निचे जाने की हिम्मत नहीं थी. हम सभी ने फैसला किया की हम लोग वापिस helicopter से जायेंगे। बस हम लोगो ने चाय पी और निकल पड़े Helicopter के लिए. जहा Helicopter खड़ा होता है वह पहुंचे तो देखा वहा तो पहले से ही बहुत से लोग खड़े है. जिन्होंने एक दिन पहले की बुकिंग करवाई हुई थी.
केदारनाथ के सुबह के फोटो 

केदारनाथ में चारो तरफ केवल बर्फ ही बर्फ 

हम लोगो ने बड़ी मुश्किल से अपने लिए 2500 रूपये पर मेंबर के हिसाब से Helicopter बुक किया और इन्तजार करने लगे Helicopter के आने का. इन्तजार काफी लम्बा था तो मैंने फिर से अपना Mobile बाहर निकल लिया। और लगा मनमोहक द्रश्य को अपने मोबाइल में कैद करने को. ऊपर जो आप फोटो देख रहे हो ये Morning की ही फोटो है.

फोटोग्राफी करते करते मेरे साथी ने मुझे सुचना दी कि Helicopter वालो ने हमारे पैसे वापिस कर दिए है. उनके पास सीट नहीं है. हम सभी दुबारा से हेलीकाप्टर वाले के पास गए और अपनी मजबूरी बताई लेकिन उन लोगो के लिए हमारी मजबूरी कोई मायने नहीं रखती थी. हम लोगो को चाज पड़ताल के बाद पता चला की अब ये लोग एक मेंबर के 3000 रूपये ले रहे है. जो 3000 रूपये देगा उसे ही सीट मिलेगी।

केदारनाथ में भीड़ बहुत ज्यादा थी जिसकी वजह से Helicopter वालो के लिए पैसा कमाने का अच्छा मौका था. उन्हें लोगो की मज़बूरी की परवा नहीं थी बल्कि उन्हें पैसा कमाना था खेर हम लोगो की पैदल निचे जाने की हिम्मत नहीं थी तो हम चारो ने 3000 रूपये पर मेंबर के हिसाब से 12000 रूपये उस हेलीकाप्टर वाले को देकर अपनी सीट बुक कर ली.
kedarnath helicopter service
kedarnath में helicopter उतरता हुवा 
थोड़े टाइम के बाद ही Helicopter आ गया ऊपर आप फोटो में देख सकते हो. पहली बार हम लोग किसी Helicopter में बैठे। Helicopter में वजन के हिसाब से सीट पर बैठाया जाता है. जो लोग हल्के होते है उन्हें आगे पायलेट के पास बैठा दिया जाता है. और जो लोग भारी होते है उन्हें पीछे की सीट पर बैठाया जाता है.

मैं तो हल्का फुल्का हु और एक मेरा साथी था जो की मेरी ही तरह था तो हम दोनों लोगो को पायलेट के पास बैठने का मौका मिला। जब Helicopter उड़ा तो मजा आ गया ऊपर से निचे का नजारा देख कर. मात्र 10 मिनट में ही Helicopter ने हमे सीतापुर उतर दिया। जिस kedarnath dham yarta को हमने पुरे दिन पैदल चल कर पूरा किया। उस यात्रा का सफर केवल 10 मिनट में एक Helicopter ने पूरा कर दिया।

भले ही हमारे 3000 रूपये सवारी के हिसाब से पैसे खर्च हो गए थे लेकिन हम लोग टाइम से निचे वापिस आ गए और उसी टाइम अपनी गाडी में बैठकर Haridwar के लिए वापिस भी हो गए.  6 बजे के करीब हम लोग अपने घर Haridwar में पहुंच चुके थे. मेरी पहली Kedarnath Dham Yatra कुछ खट्टी मीठी यादो के साथ सफलता पूरवक पूरी हो गयी थी.

अब फिर दुबारा से केदारनाथ धाम जाने का मन है लेकिन इस बार पूरी तैयार के साथ जाऊंगा। ताकि किसी भी तरह की कोई परेशानी ना आये. Kedarnath Dham Yatra सच में एक बेहतरीन यात्रा है. आप सभी अपनी जिंदगी में से थोड़ा सा टाइम निकाल कर भगवान केदारनाथ जी के दर्शन जरूर करे. आप सभी को भगवान के धाम में पहुंच कर ऐसा एहसास होगा ऐसी शांति मिलेगी जिसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते।

मैंने फिर से अपने उन साथियो का दिल से धन्यवाद देना चाहूंगा। जिन्होंने मेरे केदारनाथ धाम जाने के सपने को पूरा किया। और मेरी यात्रा को यादगार बनाया। मई में फिर से Uttarakhand में मौजूद Char Dham के कपाट खुल रहे है. और इस बार हमारा विचार गंगोत्री जाने का है अगर सब ठीक रहा थो इस बार Gangotri Dham की Yatra करेंगे।

Meri Kedarnath Dham Yatra की पोस्ट बहुत ज्यादा लम्बी हो गयी है. अब अपनी पोस्ट को यही विराम देता हु. Kedarnath Dham Yatra से जुड़ा अगर आपके मन में कोई भी सवाल हो तो आप मुझे मेरे Mobile Number 7060830844 पर फोन करके पूछ सकते हो. मुझे खुशी मिलेगी केदारनाथ से जुडी बात आप लोगो को बताने में. चलिए अब में चलता हु. मिलता हु अपनी अगली पोस्ट में. मेरी इस पोस्ट को अपने Facebook और Whatsapp पर जरूर शेयर करे. ताकि हर कोई भगवान भोलेनाथ की महिमा को महसूस कर सके. और केदारनाथ धाम आकर भगवान के दर्शन कर सके. तो एक बार दिल से बोलिये।

शंकर भगवान की जय      

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Mayank Bhardwaj

                    ------------चेतावनी----------- 
इस profile में लिखी गयी सारी बातें सत्य घटना पर आधारित हैं । इन बातों का किसी और व्यक्ति/घटना से किसी भी प्रकार से मिलना (वैसे किसी से मिलेगी नही) महज़ एक संयोग समझा जाएगा । ********************** मैं एक नम्बर का लुच्चा, लफंगा, आवारा, बद्तमीज़, नालायक, बदमाश, दुष्ट, पापी, राक्षस (और जो बच गया हो उसे भी जोड़ लो) कतई नही हूँ यार । हाँ दारू, सुट्टा, गाँजा, अफ़ीम, हेरोइन वगैरह……अबे ये सब भी नही पीता हूँ यार मैं बहुत होनहार , सीधा-साधा , सबको प्यार करने वाला , नेक दिल , ईमानदार, हिम्मती, शरीफ़ (अबे पूरे शरीर से शराफ़त टपकती है भाई), भोलाभाला (बस भोला हूँ भाला वगैरह नही रखता यार………अबे आदिवासी ठोड़े ही हूँ) लडका हूँ 

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  1. सर जी आपकी यात्रा की पोस्ट की जानकारी जानकर हमको बहुत अच्छा uske liye aapka bahut bahut Shukriya Kabhi time Milta Hai To Hum Bhi Darshan karna Chahoonga आपने हमें उससे अवगत कराया उसके लिए आपका धन्यवाद

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