skyandtelescope



आसमान का अध्ययन इंसान का संभवतः सबसे पुराना शगल रहा है। प्रागैतिहासिक काल से मनुष्य आकाश मे असख्या रहस्यों का पता लगाने मे जुटा है। आखिर आकाश कितनी उचाई पर है, जो नीली छतरी दिखाई देती है, उसके उपर क्या है, हम इस धरती पर क्यो है और क्या हमारे जैसे और भी लोग ब्रह्यांड मे कहीं और है, ये चंद ऐसे सवाल है जिनका जवाब तलाशने की हर संभव कोशिश हो रही है। खगोल विज्ञान अध्ययन का एक विषय है पर पिछले कुछ दिनों खगोलीय यानी आकाशीय घटनाओं पर नजर रखना एक शौक को और बढ़ाया है। कहने का मतलब यह है कि अब आकाशीय गतिविधियो को देखने के तीन तरीके आपके पास है। एक टेलीस्कोप वाला मेथड है, दूसरा इंटरनेट से डाटा डाउनलोड करने वाला और तीसरा सोफ्टवेयर  के जरीए वर्चुअल विजुअलाइजेशन का तरीका है।


अंतरिक्ष में देखने का सबसे शुरूआती हार्डवेयर दूरबीन है। यह सस्ता होता है। इसमें आपको बहुत हाई मैगनिफिकेशन की भी जरूरत नही है। ये हल्के होते है और इनसे अंतरिक्ष में देखते हुए आप थकते भी नही है। हालांकि आप चाहें तो टइपॉड ले सकते है जिस पर इसे रख कर ज्यादा आसानी से आप अंतरिक्ष की सैर कर सकते है। (www.skyandtelescope.com) पर जाकर आपको पर्याप्त सुक्षाव मिल जाएंगे कि आपको किस किस्म के दूरबीन और उनके लिए उनके लिए किस तरह के टइपॉड खरीदना चाहिए ताकि आप बेहतर स्टारगेजिंग कर सकें। आज ढेर सारे टेलीस्कोप बाजार मे उपलब्ध है। आपको टेलीस्कोप उसके अपर्चर साइज के आधार पर चुनना चाहिए कि आपका चयन सिर्फ मैगनिफिकेशन पर आधारित न हो। अगर आपका टेलीस्कोप ज्यादा अपर्चर वाला है और उसका मैगनिफिकेशन भी ज्यादा हो तो हो सकता है कि आपको आकाश में धुंधला सा दिखाई दे। उदाहरण के लिए 50 एक्स का टेलीस्कोप आपको जूपिटर के चंद्रमा और शनि के रिंग्स देखने में मदद कर सकता है, लेकिन अगर आप मंगल की सतह देखना चाहते है तो 150 एक्स या इससे भी बेहतर टेलीस्कोप चाहिए होगा। इस बारे में ज्यादा जानकारी (www.scsastro.co.uk/telescope_selector) पर मिल सकती है।


जहां तक कंप्यूटराइज्ड स्टारगेजिंग का मामला है तो इसके लिए आपको एक नार्मल ऑप्टिकल टेलीस्कोप को कंप्यूटर के साथ जोड़ना होगा। इन्हे स्टार लोकेटिंग टेलीस्कोप बोलते है। ये आपके लिए आकाश में आपकी पसंद के ऑब्जेक्ट को तलाश कर देते है। लेकिन मुश्किल यह है कि आप इन्हे जितनी बार इस्तेमाल करेंगे उतनी बार सेट करना होता है यह काफी थका देने वाला काम होता है। सबसे पहले टेलीस्कोप को टइपॉड के लेवल मे सेट करना होता है और इनकी पोजिशन ऐसी रखनी होती है, जिसके एक साथ ज्यादा चमकदार तारों पर फोकस बने। इसमें एक हैंड कंटेलर होता है। सेलेस्टर नेक्स्टर रेंज में बिल्ट इन स्टार कैटलॉग होता है, हैंड कंटेलर से स्टार कैटलॉग के तारो को एक्सेस किया जा सकता है। उसके इस्तेमाल से आप सबसे पहले कोई स्टार या दूसरा कोई ऑब्जेक्ट सिलेक्ट करते है फिर आपका टेलीस्कोप तेजी से आपके द्वारा सिलेक्ट किए गए ऑब्जेक्ट की ओर घुमता है और जैसे जैसे उसके पास पहुंचता है इसकी स्पीड स्लो हो जाती है। इसमें एक पैकेज होता है टूर ऑफ द टॉप 10 ऑब्जेक्टस इन द स्काई का ऑब्जेक्टस इन द स्काई का ऑप्शन भी है, आप समय और जगह के हिसाब से इसे कस्टमाइज कर सकते हैं।


एक डिवाइस है सेलेस्टन का स्काईस्काउट, यह अपेक्षाकृत नया डिवाइस है। हाथ मे रख कर इस्तेमाल करने वाले इस यंत्र में छ हजार ऑब्जेक्टस की बिल्ट इन रिकार्डिग है। आप जिस पोजिशन मे खडे होगे वहां से टॉप टेन ऑब्जेक्ट देखने की सुविधा भी यह आपको देगा। इसे यूएसबी पोर्ट के जरिए आप अपने कंप्यूटर से जोड़ सकते है। इसकी खास बात यह है कि इसमें आपको सेटिंग के काम मे नही उलझना होता है यह काम ये खुद ही कर लेता है। दूसरे इसमे एक जीपीएस रिसीवर होता है जो आपकी लोकेशन और समय बताता है। इसमे थ्री एक्सिस और ग्रेविटेशन इफेक्टस का अध्ययन करता है। इससे आप आकाश में जो कुछ भी देखते है उसके बारे में बेहतर डाटा हासिल हो पाता है। इसमे यह सुविधा भी है कि आप आकाश मे जो कुछ देखते है उसकी तस्वीर भी ले सकते है।

अगर आप कंप्यूटर पर बैठ कर एस्टेनॉमी का आनंद लेना चाहते हैं तो आपको स्लोअन डिजिटल स्काई सर्वे से शुरूआत करनी चाहिए। (www.sdss.org)पर जाकर इसकी शुरूआत कर सकते हैं। यह एक बहुत महत्वाकांक्षी परियोजना है जिससे पूरे ब्रह्यांड की त्रिआयामी मैप बनाने के लिए शुरू किया गया था। हालांकि इसे नेविगेट करने में थोडी परेशानी होती है।
दूसरी अच्छी वेबसाइड सेड मेसियर कैटलॉग की है जिसे आप (messier.obspm.fr) से एक्सेस कर सकते है। यह एक किस्म के ऑब्जेक्ट की बहुत साफ तस्वीर दिखाता है और साथ ही उसके बारे मे सूचनाएं भी देता है। हाल के दिनो गूगल अर्थ का न्यू स्काई फीचर लांच हुआ है। इसमे एक क्लिक से आप व्यूप्वाइंट से धरती से आकाश तक चेंज कर सकते है। आप सारे आकाशीय ग्रहों में नेविगेट कर सकते हैं। और जूम करके उन्हे देख सकते हैं। इसे आप (earth.google.com) पर देख सकते है ।

एक वेबसाइट है (www.starrynightstore.com) यहां पर एक करोड़ 60 लाख तारों का बैंक है आप इस साइट पर जाकर इतने तारों को देख सकते है। अगर आप स्टारगेजिंग के शौकिन हैं तो इन साइटस से आपको बहुत मदद मिलेगी।
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Mayank Bhardwaj

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इस profile में लिखी गयी सारी बातें सत्य घटना पर आधारित हैं । इन बातों का किसी और व्यक्ति/घटना से किसी भी प्रकार से मिलना (वैसे किसी से मिलेगी नही) महज़ एक संयोग समझा जाएगा । ********************** मैं एक नम्बर का लुच्चा, लफंगा, आवारा, बद्तमीज़, नालायक, बदमाश, दुष्ट, पापी, राक्षस (और जो बच गया हो उसे भी जोड़ लो) कतई नही हूँ यार । हाँ दारू, सुट्टा, गाँजा, अफ़ीम, हेरोइन वगैरह……अबे ये सब भी नही पीता हूँ यार मैं बहुत होनहार , सीधा-साधा , सबको प्यार करने वाला , नेक दिल , ईमानदार, हिम्मती, शरीफ़ (अबे पूरे शरीर से शराफ़त टपकती है भाई), भोलाभाला (बस भोला हूँ भाला वगैरह नही रखता यार………अबे आदिवासी ठोड़े ही हूँ) लडका हूँ 

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2 comments so far,Add yours

  1. अरे मयंक भाई,
    ये तारे देखने के लिए इतनी मशक्कत की क्या जरूरत है ?
    हम तो एक झपाटे में ही सामने वाले को दिन में तारे दिखला देते हैं, हा हा।
    अच्छी जानकारी दी आपने। धन्यवाद।

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  2. दोस्तों
    आपनी पोस्ट सोमवार(10-1-2011) के चर्चामंच पर देखिये ..........कल वक्त नहीं मिलेगा इसलिए आज ही बता रही हूँ ...........सोमवार को चर्चामंच पर आकर अपने विचारों से अवगत कराएँगे तो हार्दिक ख़ुशी होगी और हमारा हौसला भी बढेगा.
    http://charchamanch.uchcharan.com

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