बिना कमेन्ट के भी मै खुश हु।



आज कुछ अलग लिखने का मन करा तो सोचा कुछ ऐसा लिखू जो मेरी जिन्दगी से जुड़ा हो और जिसमे से कुछ आपकी जिन्दगी से भी जुड़ा होगा

जिंदगी है छोटी पर हर पल मे आज खुश हुं
आज पनीर नही है दाल मे ही खुश हुं।
आज गाड़ी मे जाना है वक्त नही
दो कदम चल कर ही खुश हु।
आज किसी का साथ नही
किताब पढ कर ही खुश हुं।
आज कोई नराज है
उसके इस अंदाज मे भी खुश हुं।
जिसको देख नही सकता
उसकी आवाज मे भी खुश हुं।
जिसको पा नही सकता
उसकी याद मे भी खुश हुं।
आने वाले पल का पता नही
सपनो मे ही खुश हुं।
हंसते हंसते ये पल बितेंगे
ये सोच कर ही खुश हुं।
जिंदगी है छोटी हर पल मे खुश हुं।
कैसा लगा अगर दिल को छुआ तो कमेन्ट करना
वरना बिना कमेन्ट के भी मै खुश हुं।
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Mayank Bhardwaj

                    ------------चेतावनी----------- 
इस profile में लिखी गयी सारी बातें सत्य घटना पर आधारित हैं । इन बातों का किसी और व्यक्ति/घटना से किसी भी प्रकार से मिलना (वैसे किसी से मिलेगी नही) महज़ एक संयोग समझा जाएगा । ********************** मैं एक नम्बर का लुच्चा, लफंगा, आवारा, बद्तमीज़, नालायक, बदमाश, दुष्ट, पापी, राक्षस (और जो बच गया हो उसे भी जोड़ लो) कतई नही हूँ यार । हाँ दारू, सुट्टा, गाँजा, अफ़ीम, हेरोइन वगैरह……अबे ये सब भी नही पीता हूँ यार मैं बहुत होनहार , सीधा-साधा , सबको प्यार करने वाला , नेक दिल , ईमानदार, हिम्मती, शरीफ़ (अबे पूरे शरीर से शराफ़त टपकती है भाई), भोलाभाला (बस भोला हूँ भाला वगैरह नही रखता यार………अबे आदिवासी ठोड़े ही हूँ) लडका हूँ 

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19 comments so far,Add yours

  1. मै कमेन्ट करके खुश हू............:)

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  2. मयंक जी भले ही हम लोग कमेंट नही करते पर आप को हमेशा पढते है और आपके पोस्‍ट का इंतजार करते है
    सुधीर

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  3. "जिसको पा नही सकता
    उसकी याद मे भी खुश हुं।
    आने वाले पल का पता नही
    सपनो मे ही खुश हुं।"
    बहुत खूब ....

    अचानक ऐसा मूड क्यूँ भाई ?
    सब खैरियत तो है न :)

    आप सिर्फ वही कमेन्ट पढ़ते हैं जो यहाँ मैं लिख पाता हूँ
    वो कमेन्ट आप कहाँ देख पाते हैं जो दिल में ही जज्ब होकर रह जाते हैं.

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  4. .

    चर्चा मंच से होते हुए आपके ब्लॉग पर आना हुआ। यहाँ आकर आपकी रचना पढ़ी , बहुत अच्छी लगी । आपको बधाई।

    जहाँ तक कमेन्ट का सवाल है , पहले मैं भी आपकी तरह सोचती थी , जब जुलाई में ब्लॉग लिखना शुरू किया था। इस विषय पर एक पोस्ट भी लिखी--

    " क्या आप भी चोर हैं ? "
    http://zealzen.blogspot.com/2010/08/blog-post_27.html

    लेकिन बाद में धीरे धीरे समझ आया , टिप्पणियाँ लिखते समय लोग अनेकानेक पूर्वाग्रहों से ग्रस्त होते हैं।

    कुछ लोग ईर्ष्यावश टिपण्णी नहीं करते , कुछ किसी वजह से आपसे नाराज हो जायेंगे तो टिपण्णी करना बंद कर देंगे , कुछ ये सोचकर नहीं करते की उनकी टिपण्णी से कहीं कोई ब्लोगर jyada उंचाइयां न छू ले। कुछ लोगों को आपके ब्लॉग पर बढती टिप्पणियों से constipation या फिर diarrhoea हो जाएगा , इसलिए वो टिपण्णी नहीं करते।

    मुझसे तो एक वरिष्ट ब्लोगर ने मेल लिखकर कहा की आपके ब्लॉग पर टिपण्णी बहुत रहती है , इसलिए नहीं करता। मैंने भी सोचा - अच्छा हुआ ये नहीं करता , क्यूंकि उन लोगों की टिपण्णी का कोई महत्त्व नहीं जो लेख नहीं पढता बल्कि टिपण्णी की संख्या गिनता है।

    Continued...

    .

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  5. .

    मयंक जी ,

    १-सबसे पहले तो बधाई दूंगी की आपने बिना टिप्पणियों के खुश रहना सीख लिया है।
    २- लेख समाज के हित में होने चाहिए और अपनी ख़ुशी के लिए होने चाहिए। कोई पढ़े न पढ़े, टिपण्णी करे न करे ये उसकी आज़ादी।
    ३- एक बात पक्की जानिये , समय के साथ ब्लॉग जगत में चिढने वाले बहुत पैदा हो जाते हैं और वो ही आपके ब्लॉग सबसे पहले पढ़ते हैं, लेकिन उनके मन का चोर उन्हें टिपण्णी करने से रोक देता है।
    ४- कुछ लोग किसी को प्रोत्साहन नहीं देना चाहते इसलिए नहीं लिखते।
    ५-कुछ लोग व्यस्त होते हैं, जिनके पास पढने का तो टाइम है, लिखने का नहीं।

    मैं जितने लेख पढ़ती हूँ, उन पर प्रतिक्रया अवश्य देती हूँ। मुझे लगता है ये पाठक का नैतिक दायित्व है।

    आपको बहुत सी शुभ कामनाओं के साथ ,
    दिव्या।

    .

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  6. comment ki talash me har blogger hota hai ,par sach janiye is se kuchh nahi hota hai,aap badhiya likhte hai ye hum jaan gaye .charcha manch par aane ka yahi parinan hota hai .mere blog ''vikhyat' par aapka hardik swagat hai .

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  7. साहित्यिक रचनाओं पर कमेन्ट कम आते है बनिस्बत किसी सामाजिक या राजनैतिक बहस की पोस्टों के

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  8. मंमयंक जी आप लिखते रहें हमे आपके ब्लाग पर टिप्पणी कर के बहुत खुशी होती है। कम्प्यूटर मे कुछ प्राब्लम आ गयी थी इस लिये देर से आयी हूँ। वाइरस ने परेशान कर रखा है आज सही हुया । आप हमारे लिये इतनी उपयोगी बातें लिखते हैं उनके आगे एये टिप्पणी क्या चीज़ है।ीआप टिप्पणी की परवाह किये बिना लिखें। बहुत बहुत आशीर्वाद।

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  9. मयंक भाई ...आप लिखते रहिये ...
    शुभकामनाएं
    आपका सभी लेख सराहनीय है, समय अभाव के कारण आजकल आपके लेख पढ़ लेट-लपेट पढ़ पाता हूँ ..

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  10. Dear Bhardwag Ji aapke sabhi lekh ko mai niymit rup se padhta hoo , or mughe baht achi lagee hai, aap eashe hi hamara margdarshan karte rahiye dhanyavad or jo lekh mughe pasand aate hai wo facebook par bhi share kar leta hoo.....dhanyavad sir~~~

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  11. श्रीमान,
    मयंक भारद्वाज जी
    आपकी कविता "बिना कमेन्ट के भी मैँ खुश हूँ"
    बहुत अच्छी लगी!
    हमने आपका लेख पहली बार पढा और आगे भी पढते रहेगे!
    िना कमेन्ट के भी मैँ खुश हूँ"
    बहुत अच्छी लगी!
    हमने आपका लेख पहली बार पढा और आगे भी पढते रहेगे!

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  12. This comment has been removed by the author.

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  13. U r so great Mr Mayank, Lunching this site. I hope successful your hard work. Wish u all the very best.

    Sagar
    DSVV, Haridwar (UK)

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  14. कुछ ब्लाग किसी भी कमेन्ट्स के मोहताज़ नहीं है...उनको लगभग सभी ब्लागर पढ़ते ही हैं। आपका ब्लाग भी ऐसा ही है......

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  15. कैसा लगा अगर दिल को छुआ तो कमेन्ट करना
    वरना बिना कमेन्ट के भी मै खुश हुं।

    बस और क्या चाहिए इंसान को,,संतुष्टि ,,वो आपको मिल गई

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  16. akhirkar khushi hi mahatvpurn hoti hain.
    koi likh ke khush
    koi bina likhe khush
    koi tippadi kar ke khush
    koi blog me bhadas nikal ke khus
    koi frustation ka blog likh ke khush
    koi frustation me tippadi likh ke khush
    koi hamesha dusaron ko kosh ke khush
    rahane dete hain bhai.. nahi to list lambi ban padegi
    ;)

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  17. mayank ji comment ki icchha wo log rakhte hai jinhe samman ka moha hota hai. waise bade bujurgo ne kaha hai = "karm kiye ja fal ki chinta mat kar".

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