किताब पढ़ने का शौक हर किसी को है। अलग अलग भाषा और अलग अलग लेखको की पुस्तकें पढ कर दिल खुश हो जाता है लेकिन इतनी पुस्तकें मिलेंगी कहां। घर मे तो रह नही सकती और हर रोज पुस्तक पढ ने लाइब्रेरी जाएं इतना समय नही है। ऐसे मे आप इंटरनेट पर बुक की तलाश करते है लेकिन हम कहें कि आपके घर मे नही बल्कि हाथ में ही एक लाख से ज्यादा पुस्तक देंगे तो क्या आप विश्वास करेगे लेकिन यह सच्चाई है। मोबाइल एप्लिकेशन वाँटपैड देता है आपको ऐसी ही आजादी। जहां आप राह चलते अपने मोबाइल पर बुक का मजा ले सकते है।
वाँटपैड एप्लिकेशन की शुरूआत में आपके सामने माई लाइब्रेरी और सेटिंग सहित कुछ आँप्शन आएंगे। सैटिग मे जाकर पहां आप बैकग्राउंड, टेक्स कलर, टेक्स साइट और भाषा सहित कई अन्य सेटिंग्स कर सकते है। एप्लिकेशन मे इंग्लिश और हिन्दी सहित २४ भाषाओ के लेख और पुस्तके उपलब्ध है। एप्लिकेशन मे आप पुस्तको को आँफ लाइन डाउनलोड भी कर सकते है। एप्लिकेशन का उपयोग बहुत ही आसान है और इस पर ढेर सारे रोचक लेख व आर्टिल्स भी उपलब्ध है।
एप्लिकेशन को एअरटेल एप्स स्टोर से मुफ्त मे डाउनलोड किया जा सकता है। हां ध्यान रहे कि डाटा चार्ज आपको चुकाना पड़ेगा
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Mayank Bhardwaj

                    ------------चेतावनी----------- 
इस profile में लिखी गयी सारी बातें सत्य घटना पर आधारित हैं । इन बातों का किसी और व्यक्ति/घटना से किसी भी प्रकार से मिलना (वैसे किसी से मिलेगी नही) महज़ एक संयोग समझा जाएगा । ********************** मैं एक नम्बर का लुच्चा, लफंगा, आवारा, बद्तमीज़, नालायक, बदमाश, दुष्ट, पापी, राक्षस (और जो बच गया हो उसे भी जोड़ लो) कतई नही हूँ यार । हाँ दारू, सुट्टा, गाँजा, अफ़ीम, हेरोइन वगैरह……अबे ये सब भी नही पीता हूँ यार मैं बहुत होनहार , सीधा-साधा , सबको प्यार करने वाला , नेक दिल , ईमानदार, हिम्मती, शरीफ़ (अबे पूरे शरीर से शराफ़त टपकती है भाई), भोलाभाला (बस भोला हूँ भाला वगैरह नही रखता यार………अबे आदिवासी ठोड़े ही हूँ) लडका हूँ 

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2 comments so far,Add yours

  1. भारद्वाज जी आपने ये बहुत काम की बात बताई है |

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  2. इस को प्रयोग में लाने के लिए किस तरह के मोबाइल की जरूरत पड़ेगी?

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